प्रलय़नाचन नाचले यखन आपन भुले
Praloy nachon nachle
विचित्र
प्रलय़नाचन नाचले यखन
आपन भुले,
हे नटराज, जटार वाँधन पड़ल खुले॥
जाह्नवी ताइ मुक्त धाराय़ उन्मादिनी दिशा हाराय़,
सङ्गीते
तार तरङ्गदल उठल दुले॥
रविर आलो साड़ा दिल आकाश-पारे,
शुनिय़े दिल अभय़वाणी घर-छाड़ारे।
आपन स्रोते आपनि माते, साथि हल आपन-साथे,
सव-हारा ये सव पेल तार कूले कूले॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Prolay naachon naachle jakhon aapon bhule, Hey natoraaj, jataar bnaadhon porlo khule. Janhabi taai mukto dhaaray unmaadini disha haaray, Songite taar tarongo utthlo dule. Robir aalo saara dilo aakash-paare. Shuniye dilo abhoybaani ghor-chaarare. Aapon srote aapni maatey, saathi holo aapon-saathe, Sob-haara se sob pelo taar kule kule.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1929(১৩৩৬)
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