पूर्वगगनभागे
Purbogagonbhage dipto
पूजा
२६५
पूर्वगगनभागे
दीप्त हइल सुप्रभात
तरुणारुणरागे।
शुभ्र शुभ मुहूर्त आजि सार्थक कर’ रे,
अमृते भर’ रे–
अमितपुण्यभागी के
जागे के जागे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Purbagagonobhaage Deepto hoilo suprobhato Torunarunoraage. Shubhro shubho muhurto aaji saarthako karo re, Amrite bharo re - Amitopunyobhaagee ke Jaage ke jaage.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 18 January 1927(৫ মাঘ ১৩৩৩)
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