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गीत / पूजा
रहि रहि आनन्दतरङ्ग जागे Rohi rohi anandataranga
पूजा
बोल स्वरलिपि रिकॉर्डिंग जानकारी अनुवाद
५४५
रहि रहि आनन्दतरङ्ग जागे–
रहि रहि, प्रभु, तव परशमाधुरी
हृदय़माझे आसि लागे।
रहि रहि शुनि तव चरणपात हे
मम पथेर आगे आगे।
रहि रहि मम मनोगगन भातिल
तव प्रसादरविरागे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Rohi rohi anondotarongo jaage.
Rohi rohi, probhu, tabo paroshmaadhuri
Hridayomaajhe aasi laage.
Rohi rohi shuni tabo charonopaato he
Mamo pathero aage aage.
Rohi rohi mamo monogagono bhaatilo
Tabo prosadorobiraage. इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
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स्वरबितान खण्ड स्वरबीतन २७(স্বরবিতান ২৭) स्वरलिपि दिनेंद्रनाथ ठाकुर दिनेंद्रनाथ ठाकुर 1882–1935 Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan. Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain
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