सकलकलुषतामसहर, जय़ होक
Sakalkalushatamosahar joy
पूजा
सकलकलुषतामसहर, जय़ होक तव जय़– अमृतवारि सिञ्चन कर’ निखिलभुवनमय़– महाशान्ति, महाक्षेम, महापुण्य, महाप्रेम॥ ज्ञानसूर्य-उदय़-भाति ध्वंस करुक तिमिरराति– दु:सह दु:स्वप्न घाति अपगत कर’ भय़॥ मोहमलिन अति-दुर्दिन-शङ्कित-चित पान्थ जटिल-गहन-पथसङ्कट-संशय़-उद्भ्रान्त। करुणामय़, मागि शरण– दुर्गतिभय़ करह हरण, दाओ दुःखवन्धतरण मुक्तिर परिचय़॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sakolokolushotaamsohar, jay hok tabo jay - Amritobaari sinchan karo nikhilobhubanomoy - Mahashaanti, mahakhem, Mahapunya, mahaprem. Gyansurjo-udayo-bhaati dhangsho koruk timiro raati - Duhsaho duswapno ghaati apogato karo bhay. Mohomolin oti-durdin-shankito-chito pantho Jotil-gahon-pathsankato-sanshayo-udbhranto. Karunamay, maagi sharon - durgotibhay karoho haron, Daao dukkhobandhotaron muktir porichoyi.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 377(পূজা)
- उप-पर्याय
- बिबिध(বিবিধ)
- राग
- सहन(সাহানা)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- संकलन
- नटीर पुजा(নটীর পূজা)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन १३(স্বরবিতান ১৩)
- स्वरलिपि
- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1931(১৩৩৮)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।