सन्न्यासी,
Sannyasi dhyane nimagna
प्रेम और प्रकृति
सन्न्यासी, ध्याने निमग्न नग्न तोमार चित्त । वाहिरे ये तव लीन हल सव वित्त ॥ रसहीन तरु, निष्ठुर मरु, वातासे वाजिछे रुद्ध डमरु, धरा-भाङार रिक्त ॥ जागो तपस्वी, वाहिरे नयन मेलो हे । जागो ! स्थले जले फुले फुले पल्लवे चपल चरण फेलो हे । जागो ! जागो गाने गाने नव नव ताने, जागाओ उदास हताश पराने उदार तोमार नृत्य ॥ जागाओ ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Sannyasi, Dhyane nimagno nagno tomar chitto. Baahire je tabo leen holo sob bitto. Rosoheen taru, nishtthur moru, Baatase baajichhe rudra damaru, Dhora-bhandar rikto. Jaago taposwi, baahire nayon melo hey. Jaago! Sthole jole phule phole pallobe Chapol charon phelo hey. Jaago! Jaago gaane gaane nabo nabo taane, Udaar tomar nrityo. Jaagao.
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- पर्याय
- प्रेम और प्रकृति · 75(প্রেম ও প্রকৃতি)
- स्वरबितान खण्ड
- नोततिओन नोत अवैलब्ले(স্বরলিপি পাওয়া যায়নি)
- रचनाकाल
- 1927(১৩৩৪)
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