गीत / स्वदेश

सार्थक जनम आमार जन्मेछि एइ देशे

sarthaka janama amara janmechi ei deshe

स्वदेश
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सार्थक जनम आमार जन्मेछि एइ देशे।

सार्थक जनम, मा गो, तोमाय़ भालोवेसे॥

       जानि ने
तोर धनरतन  आछे कि ना रानीर मतन,

शुधु    जानि आमार अङ्ग जुड़ाय़ तोमार छाय़ाय़ एसे
॥

       कोन्
वनेते जानि ने फुल  गन्धे एमन करे आकुल,

कोन् गगने ओठे रे चाँद एमन हासि हेसे।

       आँखि मेले
तोमार आलो  प्रथम आमार चोख जुड़ालो,

ओइ आलोतेइ नय़न रेखे मुदव नय़न शेषे॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।