श्रावणवरिषन पार हय़े
Shrabanaborisano par hoye
प्रकृति
श्रावणवरिषन पार हय़े की वाणी आसे ओइ रय़े रय़े॥
गोपन केतकीर परिमले, सिक्त वकुलेर वनतले,
दूरेर आँखिजल वय़े वय़े की वाणी आसे ओइ रय़े
रय़े॥
कविर हिय़ातले घुरे घुरे आँचल भरे लय़ सुरे सुरे।
विजने विरहीर काने काने सजल मल्लार गाने
गाने
काहार
नामखानि कय़े कय़े
की वाणी आसे ओइ रय़े रय़े॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shraabonoborishano paar hoye ki baani aase oi roye roye. Gopan ketokir porimale, sikto bakuler banotale, Durer aakhijal boye boye ki baani aase oi roye roye. Kobir hiyatale ghure ghure aanchol bhore loy sure sure. Bijane birohir kaane kaane sajol mallar gaane-gaane Kaahar naamkhani koye koye Ki baani aase oi roye roye.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1924(১৩৩১)
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