शुभ्र नव शङ्ख तव गगन भरि वाजे
Shubhro naba shankha
पूजा
२६४
शुभ्र नव शङ्ख तव गगन भरि वाजे,
ध्वनिल शुभ जागरणगीत।
अरुणरुचि आसने चरण तव राजे,
मम हृदय़कमल विकशित॥
ग्रहण कर’ तारे तिमिरपरपारे,
विमलतर पुण्यकरपरश-हरषित॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Shubhro nabo shankho tabo gagon bhari baaje, Dhwanilo shubho jagorangeet. Arunoruchi aasane charon tabo raaje, Mamo hridoyokamol bikashito. Grohan karo taare timiroparopaare, Bimalotaro punyokaroparosh-haroshito.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1929(১৩৩৬)
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