ওরে, তোরা নেই বা কথা বললি,
Tora nei ba kotha bolli
Jatiya Sangeet
ओरे, तोरा नेइ वा कथा वललि, दाँडिये हाटेर मध्यखाने नेइ जागालि पल्ली ॥ मरिस मिथ्ये व'के झ'के, देखे केवल हासे लोके, नाहय निये आपन मनेर आगुन मने मनेइ ज्वललि ॥ अन्तरे तोर आछे की ये नेइ रटालि निजे निजे, नाहय वाद्यगुलो वन्ध रेखे चुपेचापेइ चललि ॥ काज थाके तो कर् गे ना काज, लाज थाके त घुचा गे लाज, ओरे, के ये तोरे की वलेछे नेइ वा ताते टललि ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ore, tora nei ba katha bolli, Dnaariye haater modhyikhane nei jaagali polli. Moris mithye boke jhoke, dekhe kebol haase loke, Naahoy niye aapon moner aagun mone monei jolli. Antare tor aachhe ki je nei ratali nije nije, Naahoy baadyogulo bandho rekhe chupechaapei cholli. Kaaj thaake to kar ge na kaaj, laaj thake to ghucha ge laaj, Ore, ke je tore ki bolechhe nei ba taate tolli.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Jatiya Sangeet · 8(জাতীয় সঙ্গীত)
- ताल
- Ektaal(একতাল)
- प्रकाशित
- Bhandar
- स्वरबितान खण्ड
- 46
- स्वरलिपि
- Indira Debi Chowdhurani
- रचनाकाल
- 1905(১৩১২)
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