गीत / प्रकृति

तुमि तृष्णार शान्ति, सुन्दरकान्ति (तृष्णार शान्ति, सुन्दरकान्ति)

tumi trrishnara shanti sundarakanti trrishnara shanti sundarakanti

प्रकृति
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तृष्णार शान्ति     सुन्दरकान्ति,

तुमि एले निखिलेर सन्तापभञ्जन॥

   आँको धरावक्षे
दिग्वधूचक्षे

सुशीतल सुकोमल श्यामरसरञ्जन।

एले वीरछन्दे, तव कटिवन्धे

विद्युत-असिलता वेजे ओठे झन्झन॥

तव उत्तरीय़े   छाय़ा दिले भरिय़े–

तमालवनशिखरे नवनील-अञ्जन।

झिल्लिर मन्द्रे  मालतीर गन्धे

मिलाइले चञ्चल मधुकरगुञ्जन।

नृत्येर भङ्गे   एले नव रङ्गे,

सचकित पल्लवे नाचे येन खञ्जन॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।