उलङ्गिनी नाचे रणरङ्गे।
आमरा नृत्य करि सङ्गे॥
दश दिक आँधार क’रे
मातिल दिक्-वसना,
ज्वले वह्निशिखा राङा रसना—
देखे मरिवारे धाइछे पतङ्गे॥
कालो केश उड़िल आकाशे,
रवि सोम लुकालो तरासे।
राङा रक्तधारा झरे कालो अङ्गे—
त्रिभुवन काँपे भुरुभङ्गे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Ulangini naache ranorange. Aamara nritya kori songe.
Dash dik aandhaaro kore maatilo dik-basana,
Jwale banhishikha raanga rasana-
Dekhe maribaare dhaaichhe patange.
Kaalo kesho urilo aakashe,
Robi som lukaalo taraase.
Raanga raktadhaara jhare kaalo ange,
Tribhubano knaape bhurubhange.
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शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
रचनाकाल
1890(১২৯৭)
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