गीत / Prakriti

উতল-ধারা বাদল ঝরে (উতল ধারায়)

Prakriti
उतल-धारा वादल झरे।  सकल वेला एका घरे॥

  सजल हाओय़ा वहे वेगे,  पागल नदी ओठे जेगे,

  आकाश घेरे काजल मेघे,  तमालवने आँधार करे॥

ओगो वँधु दिनेर शेषे  एले तुमि केमन वेशे–

आँचल दिय़े शुकाव जल,  मुछाव पा आकुल केशे।

  निविड़ हवे तिमिर-राति,  ज्वेले देव प्रेमेर वाति,

  परानखानि देव पाति– चरण रेखो ताहार ’परे।

भुले गिय़े जीवन मरण  लव तोमाय़ क’रे वरण–

करिव जय़ शरम-त्रासे,  दाँड़ाव आज तोमार पाशे–

  वाँधन वाधा यावे ज्व’ले,   सुख दुःख देव
द’ले,

  झड़ेर राते तोमार साथे  वाहिर हव अभय़भरे॥

उतल-धारा वादल झरे,  दुय़ार खुले एले घरे।

  चोखे आमार झलक लागे,  सकल मने पुलक जागे,

चाहिते चाइ मुखेर वागे– नय़न मेले काँपि डरे॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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