गीत / विचित्र

उठ रे मलिनमुख (ओठो रे मलिनमुख)

utha re malinamukha otho re malinamukha

विचित्र
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ओठो रे मलिनमुख, चलो एइवार।

एसो रे तृषित-वुक, राखो हाहाकार॥

हेरो ओइ गेल वेला,   भाङिल भाङिल मेला–

गेल सवे छाड़ि खेला   घरे ये याहार॥

हे भिखारि, कारे तुमि शुनाइछ सुर–

रजनी आँधार हल, पथ अति दूर।

क्षुधित तृषित प्राणे  आर काज नाहि गाने–

एखन वेसुर ताने   वाजिछे सेतार॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।