गीत / प्रेम और प्रकृति

रिमिकि झिमिकि झरे (यवे रिमिकि झिमिकि झरे)

rimiki jhimiki jhare yave rimiki jhimiki jhare

प्रेम और प्रकृति
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रिमिकि झिमिकि झरे भादरेर धारा–

मन ये केमन करे,  हल दिशाहारा॥

येन के गिय़ेछे डेके,

रजनीते से के  द्वारे दिल नाड़ा–

रिमिकि झिमिकि झरे भादरेर धारा॥

वँधु दय़ा करो,   आलोखानि धरो हृदय़े।

आधो-जागरित तन्द्रार घोरे  आँखि जले आँखि याय़ ये भ’रे।

स्वपनेर तले छाय़ाखानि देखे    मने मने भावि
एसेछिल से के–

रिमिकि झिमिकि झरे भादरेर धारा॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।