আবার এরা ঘিরেছে মোর মন
Abar era ghirechhe
Puja
आवार एरा घिरेछे मोर मन।
आवार चोखे नामे आवरण॥
आवार ए ये नाना कथाइ जमे, चित्त आमार नाना दिके भ्रमे,
दाह आवार वेड़े ओठे क्रमे, आवार ए ये हाराइ श्रीचरण॥
तव नीरव वाणी हृदय़तले
डोवे ना येन लोकेर कोलाहले।
सवार माझे आमार साथे थाको, आमाय़ सदा तोमार माझे ढाको,
निय़त मोर चेतना-’परे राखो आलोके-भरा उदार त्रिभुवन॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aabar era ghirechhe mor mon. Aabar chokhe naame aaboran. Aabar e je naana kathai jame, chitto aamar naana dike bhrome, Daaho aabar bere otthey krome, aabar e je haarai shricharan. Tabo nirabo baani hridayotale Dobe naa jeno loker kolahole. Sabar maajhe aamar saathe thaako, aamay sada tomar maajhe dhaako, Niyato mor chetona pore raakho aaloke bhara udar tribhuban.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Puja · 166(পূজা)
- उप-पर्याय
- Biraha
- ताल
- Jhampak(ঝম্পক)
- घराना
- Hindustani
- संकलन
- Geetanjali
- प्रकाशित
- Tatwabodhini Patrika
- स्थान
- Bolpur
- स्वरबितान खण्ड
- 37
- स्वरलिपि
- Surendranath Bandopadhyay / Bhimrao Shastri
- रचनाकाल
- 1 September 1909(১৬ ভাদ্র ১৩১৬)
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