आज आकाशेर मनेर कथा
Aj akasher moner kotha
प्रकृति
आज आकाशेर मनेर कथा झरोझरो वाजे
सारा प्रहर आमार वुकेर माझे॥
दिघिर कालो जलेर ’परे मेघेर छाय़ा घनिय़े धरे,
वातास वहे युगान्तरेर प्राचीन वेदना ये
सारा प्रहर आमार वुकेर माझे॥
आँधार वाताय़ने
एकला आमार कानाकानि ओइ आकाशेर सने।
म्लानस्मृतिर वाणी यत पल्लवमर्मरेर मतो
सजल सुरे ओठे जेगे झिल्लीमुखर साँझे
सारा प्रहर आमार वुकेर माझे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaj aakasher moner katha jharo jharo baaje Saara prohar aamar buker maajhe. Dighir kaalo jaler paare megher chhaaya ghoniye dhare, Baatas bahe jugantarer praachin bedona je Saara prohar aamar buker maajhe. Aandhar baatayane Ekla aamar kaanakaani oi aakasher saane. Mlaansmritir baani jato pallobomarmorer mato Sajal sure otthe jegey jhillimukhar snaajhe Saara prohar aamar buker maajhe.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- July 1922(শ্রাবণ ১৩২৯)
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