आजि वरिषनमुखरित
Aji borisanomukhorito
प्रकृति
आजि वरिषनमुखरित श्रावणराति,
स्मृतिवेदनार माला एकेला गाँथि॥
आजि कोन् भुले भुलि, आँधार
घरेते राखि दुय़ार खुलि,
मने हय़ वुझि आसिछे से मोर दुखरजनीर साथि॥
आसिछे से
धाराजले सुर लागाय़े,
नीपवने
पुलक जागाय़े।
यदिओ वा नाहि आसे तवु वृथा आश्वासे
धूलि-’परे राखिव रे
मिलन-आसनखानि पाति॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji borishanomukhorito shraabonoraati, Smritibedonar maala akela gnathi. Aaji kon bhule bhuli aandhar gharete raakhi duwar khuli, Mone hoy bujhi aasichhe se mor dukhorajonir saathi. Aasiche se dharajale sur laagae, Nipobone pulak jaagaye. Jodio ba naahi aase tabu britha aashwase Dhuli-pare raakhibo re milano-aasanokhaani paati.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1935(১৩৪২)
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