আজি দখিন-দুয়ার খোলা
Aji dokhin duyar khola
Prakriti
आजि दखिन-दुय़ार खोला–
एसो हे, एसो हे, एसो हे आमार वसन्त एसो।
दिव हृदय़दोलाय़ दोला,
एसो हे, एसो हे, एसो हे आमार वसन्त एसो॥
नव श्यामल शोभन रथे
एसो वकुलविछानो पथे,
एसो वाजाय़े व्याकुल वेणु
मेखे पिय़ालफुलेर रेणु।
एसो हे,
एसो हे, एसो हे आमार वसन्त एसो॥
एसो
घनपल्लवपुञ्जे एसो हे, एसो हे,
एसो हे।
एसो
वनमल्लिकाकुञ्जे एसो हे, एसो हे,
एसो हे।
मृदु मधुर मदिर हेसे
एसो पागल हाओय़ार देशे,
तोमार उतला उत्तरीय़
तुमि आकाशे उड़ाय़े दिय़ो–
एसो हे, एसो हे, एसो हे आमार वसन्त एसो॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji dokhino duwar khola - Eso hey, eso hey, eso hey aamar basonto eso. Dibo hridayodolay dola, Eso hey, eso hey, eso hey aamar basonto eso. Nabo shyamolo shobhono rathe eso bokulobichhano pathe, Eso baajaye byakulo benu mekhe piyalophuler renu Eso hey, eso hey, eso hey aamar basonto eso. Eso ghanopallobopunje eso hey, eso hey, eso hey. Eso bonomollikakunje eso hey, eso hey, eso hey. Mridu modhur modir hese eso paagol haawar deshe, Tomar utola uttoriyo tumi aakashe uraaye diyo - Eso hey, eso hey, eso hey aamar basonto eso.
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- पर्याय
- Prakriti · 202(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- Basanta
- ताल
- Kaharwa(কাহারবা)
- घराना
- Hindustani
- ऋतु
- Barsha(বর্ষা)
- संकलन
- Raaja
- स्वरबितान खण्ड
- 42 (Arupratan)
- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore / Anadikumar Dastidar
- रचनाकाल
- January 1920(মাঘ ১৩২৬)
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