आजि दक्षिणपवने
Aji dokhinopabone
प्रेम
आजि दक्षिणपवने
दोला लागिल वने वने॥
दिक्ललनार नृत्यचञ्चल मञ्जीरध्वनि अन्तरे ओठे रनरनि
विरहविहवल हृৎस्पन्दने॥
माधवीलताय़ भाषाहारा व्याकुलता
पल्लवे पल्लवे प्रलपित कलरवे।
प्रजापतिर पाखाय़ दिके दिके लिपि निय़े याय़
उৎसव-आमन्त्रणे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji dokhinopabone Dola laagilo bone bone. Diklalonar nrtiyochanchalo monjirodwoni antore utthe ranoroni Birahobihwalo hritspandane. Maadhobilatay bhaasahaara byakulota Pallabe pallabe prolopito kalorabe. Projapotir paakhay dike dike lipi niye jaay Utsabo-amontrane.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- February 1923(ফাল্গুন ১৩২৯)
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