आजि ए आनन्दसन्ध्या
Aji e anandasandhya
पूजा
३२० आजि ए आनन्दसन्ध्या सुन्दर विकाशे, आहा॥ मन्द पवने आजि भासे आकाशे विधुर व्याकुल मधुमाधुरी, आहा॥ स्तव्ध गगने ग्रहतारा नीरवे किरणसङ्गीते सुधा वरषे, आहा। प्राण मन मम धीरे धीरे प्रसादरसे आसे भरि, देह पुलकित उदार हरषे, आहा॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji e aanondosondhya sundaro bikashe, aaha. Mando pabone aaji bhaase aakashe Bidhuro byakulo modhumaadhuri, aaha. Stabdho gagone grohotaara nirabe Kiranosongite sudha baroshe, aaha. Praano mano mamo dheere dheere prosadorase aase bhori, Deho pulakito udaar haroshe, aaha.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 / कांगालिचरण सेन - रचनाकाल
- 1909(১৩১৬)
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