आजि कमलमुकुलदल खुलिल
Aji kamalamukuladal
प्रकृति
आजि कमलमुकुलदल
खुलिल, दुलिल रे दुलिल–
मानससरसे
रसपुलके पलके पलके ढेउ तुलिल॥
गगन मगन हल गन्धे, समीरण मूर्छे आनन्दे,
गुन्गुन् गुञ्जनछन्दे मधुकर घिरि घिरि वन्दे–
निखिलभुवनमन भुलिल–
मन भुलिल रे मन भुलिल॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji kamolomukulodalo khulilo, dulilo re dulilo - Manososarose rasopuloke paloke paloke dheu tulilo. Gagono magono holo gandhe, somirano murchhe aanonde, Gungungunjanochhande modhukaro ghiri ghiri bande - Nikhilobhubanomono bhulilo. Mono bhulilo re mono bhulilo.
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सुरेन्द्रनाथ बंदोपाध्याय1886–1972Musician of the Vishnupur gharana, known as Sangitratnakar, and a notator of Rabindrasangeet.Eastern Zonal Cultural Centre, from the documentary “The Vishnupur Gharana” · Wikimedia Commons, CC BY 3.0 - रचनाकाल
- 1910(১৩১৭)
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