आजि कोन् सुरे वाँधिव
Aji kon sure badhibo
प्रेम और प्रकृति
आजि कोन् सुरे वाँधिव दिन-अवसान-वेलारे
दीर्घ धूसर अवकाशे सङ्गीजनविहीन शून्य भवने।–
से कि मूक विरहस्मृतिगुञ्जरणे तन्द्राहारा
झिल्लिरवे।
से कि विच्छेदरजनीर यात्री
विहङ्गेर पक्षध्वनिते।
से कि अवगुण्ठित प्रेमेर कुण्ठित
वेदनाय़ सम्वृत दीर्घश्वासे।
से कि
उद्धत अभिमाने उद्यत उपेक्षाय़
गर्वित मञ्जीरझङ्कारे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji kon sure bnaadhibo dino abosan belare Deergho dhusar abokaashe songijanobihin shunyo bhabone. - Se ki muk birahosmriti gunjarane tandrahaara jhillirabe. Se ki bichchhedorajonir jaatri bihanger pokkhodwonite. Se ki aboguntthito premer kuntthito bedonay sambrito dirghishwaase. Se ki uddhato obhimaane udyato upekkhay gorbito monjirojhankare.
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- प्रेम और प्रकृति · 94(প্রেম ও প্রকৃতি)
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 12 April 1940(২৯ চৈত্র ১৩৪৬)
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