आजि मेघ केटे गेछे सकालवेलाय़
Aji megh kete gechhe
प्रकृति
आजि मेघ केटे गेछे सकालवेलाय़,
एसो एसो
एसो तोमार हासिमुखे–
एसो आमार अलस दिनेर
खेलाय़॥
स्वप्न
यतो जमेछिल आशा-निराशाय़
तरुण
प्राणेर विफल भालोवासाय़
दिव अकूल-पाने भासाय़े भाँटार गाङेर भेलाय़।
दुःखसुखेर
वाँधन तारि ग्रन्थि दिव खुले,
आजि
क्षणेक-तरे मोरा रव आपन भुले।
ये गान हय़ नि गाओय़ा ये दान हय़ नि
पाओय़ा–
आजि
पुरव-हाओय़ाय़ तारि परिताप
उड़ाव अवहेलाय़॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji megh kete gechhe sakalbelay, Eso eso eso tomar haasimukhe. Eso aamar aloso diner khelay. Swapno jato jomechhilo aasha nirashay Torun praaner biphal bhaalobasay Dibo akul-paane bhaasaye bhnaatar gaanger bhelay. Dukhhosukher bnaadhon taari gronthi dibo khule, Aaji khanek taare mora rabo aapon bhule. Je gaan hoy ni gaawa je daan hoy ni paawa - Aaji purab-haaway taari poritap Uraabo abohelay.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1939(১৩৪৬)
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