आजि ओइ आकाश-’परे सुधाय़ भरे
Aji oi akash pore
प्रकृति
आजि ओइ आकाश-’परे सुधाय़ भरे आषाढ़-मेघेर फाँक।
हृदय़-माझे मधुर वाजे की उৎसवेर शाँख॥
एकि हासिर वाँशिर तान,
एकि चोखेर जलेर गान–
पाइ ने दिशे के जानि से दिल आमाय़ डाक॥
आमाय़ निरुद्देशेर पाने केमन करे टाने एमन करुण गाने।
ओइ पथेर पारेर आलो आमार लागल
चोखे भालो,
गगनपारे देखि तारे सुदूर निर्वाक्॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaji oi aakash-pare sudhaybhare aasharh-megher phnaak. Hridayo-maajhe modhuro baaje ki utsober shnaakh. Eki haasir bnaashir taan, eki chokher jaler gaan - Paai ni dishe ke jaani se dilo aamay daak. Aamay niruddesher paane kemon kore taane emon korun gaane. Oi pather paarer aalo aamar laaglo chokhe bhaalo, Gagonopaare deki taare sudur nirbak.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1925(১৩৩২)
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