आजिके एइ सकालवेलाते
Ajike ei sakalbelate
पूजा
३३४
आजिके एइ सकालवेलाते
वसे आछि आमार प्राणेर सुरटि मेलाते॥
आकाशे ओइ
अरुण रागे मधुर तान करुण लागे,
वातास माते आलोछाय़ार माय़ार खेलाते॥
नीलिमा एइ निलीन हल आमार चेतनाय़।
सोनार आभा जड़िय़े गेल मनेर कामनाय़।
लोकान्तरेर
ओ पार हते के उदासी वाय़ुर स्रोते
भेसे वेड़ाय़ दिगन्ते ओइ मेघेर भेलाते॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aajike ei sakalbelate Bose aachhi aamar praaner surti melate. Aakashe oi orun raage modhur taan korun laage, Baatas maate aalochhaayar maayar khelate. Nilima ei nilin holo aamar chetonay. Sonar aabha joriye gelo moner kaamonay. Lokantarer o paar hote ke udasi baayur srote Bhese beray digante oi megher bhelate.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 334(পূজা)
- उप-पर्याय
- बिश्व(বিশ্ব)
- राग
- भैरवि(ভৈরবী)
- ताल
- कहर्व(কাহারবা)
- संकलन
- गीतिमाल्य(গীতিমাল্য)
- स्थान
- शांतिनिकेतन(শান্তিনিকেতন)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४१(স্বরবিতান ৪১)
- स्वरलिपि
- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 26 April 1912(১৩ বৈশাখ ১৩১৯)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।