आलोक-चोरा लुकिय़े एल ओइ
Alok chora lukiye elo
विचित्र
आलोक-चोरा लुकिय़े एल ओइ– तिमिरजय़ी वीर, तोरा आज कइ। एइ कुय़ाशा-जय़ेर दीक्षा काहार काछे लइ॥ मलिन हल शुभ्र वरन, अरुण-सोना करल हरण, लज्जा पेय़े नीरव हल ऊषा ज्योतिर्मय़ी॥ सुप्तिसागरतीर वेय़े से एसेछे मुख ढेके, अङ्गे काली मेखे। रविर रश्मि कइ गो तोरा, कोथाय़ आँधार-छेदन छोरा, उदय़शैलशृङ्ग हते वल् ‘माभैः माभैः’॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aalok-chora lukiye elo oi - Timirojayi bir, tora aaj koi. Ei kuwasha-joyer dikkha kaahar kaachhe loi. Molin holo shubhro baron, orun-sona korlo haron, Lajja peye nirab holo usha jyotirmoyi. Suptisaagortir beye se esechhe mukh dheke, Ange kaali mekhe. Robir roshmi koi go tora, kothay aandhar-chedan chora, Udayshoiloshringo hote bol 'Maabhoi Maabhoi'.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1929(১৩৩৬)
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