आमार भुवन तो आज हल काङाल
Amar bhuban to aj
प्रेम
आमार भुवन तो आज हल काङाल, किछु तो नाइ
वाकि,
ओगो
निठुर, देखते पेले ता कि॥
तार सव झरेछे, सव
मरेछे, जीर्ण वसन ओइ परेछे–
प्रेमेर
दाने नग्न प्राणेर लज्जा देहो ढाकि॥
कुञ्जे ताहार गान या छिल कोथाय़ गेल भासि।
एवार ताहार शून्य हिय़ाय़ वाजाओ तोमार वाँशि।
तार दीपेर आलो के
निभालो, तारे तुमि ज्वालो ज्वालो–
आमार आपन
आँधार आमार आँखिरे देय़ फाँकि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar bhuban to aaj holo kaangal, kichhu to naai baaki, Ogo nitthur, dekhe pele taa ki. Taar sab jhorechhe, sab morechhe, jirno bason oi porechhe - Premer daane nagno praaner lajja deho dhaaki. Kunje taahar gaan je chhilo kothay gelo bhaasi. Aabar taahar shunyo hiyay baajao tomar bnaashi. Taar deeper aalo ke nibhalo, taare tumi jwaalo jwaalo - Aamar apon aandhar aamar aankhire dei phnaaki.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 18 February 1924(৬ ফাল্গুন ১৩৩০)
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