आमार जीर्ण पाता यावार वेलाय़
Amar jirno pata
विचित्र
आमार जीर्ण पाता यावार वेलाय वारे वारे डाक दिये याय नतुन पातार द्वारे द्वारे । ताइ तो आमार एइ जीवनेर वनच्छाये फागुन आसे फिरे फिरे दखिन वाये, नतुन सुरे गान उडे याय आकाश पारे, नतुन रङे फुल फोटे ताइ भारे भारे ॥ ओगो आमार नित्य नूतन दाँडाओ हेसे चलव तोमार निमन्त्रणे नवीन वेशे । दिनेर शेषे निवल यखन पथेर आलो, सागरतीरे यात्रा आमार येइ फुराल, तोमार वाँशि वाजे साँझेर अन्धकारे— शून्ये आमार उठल तारा सारे सारे ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar jirno paata jaabar belay baare baare Daak diye jaay notun paatar dwaare dwaare. Taai to aamar ei jibaner bonochchaaye Phaagun aase phire phire dokhin baaye, Notun sure gaan ure jaay aakash paare, Notun range phul phute taai bhaare bhaare. Ogo aamar nityo nuton, dnaarao hese. Cholbo tomar nimontrane nobin beshe. Diner sheshe niblo jakhon pather aalo, Saagortire jaatra aamar jei phuralo, Tomar bnaashi baaje snaajher andhokare - Shunye aamar utthlo taara saare saare.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 7 May 1919(২৪ বৈশাখ ১৩২৬)
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