आमार कण्ठ हते गान के निल भुलाय़े
Amar kantho hote gan
प्रेम
१३
आमार कन्ठ
हते गान के निल भुलाय़े,
से ये वासा
वाँधे नीरव मनेर कुलाय़े॥
मेघेर दिने श्रावणमासे यूथीवनेर दीर्घश्वासे
आमार प्राणे से देय़ पाखार छाय़ा वुलाय़े॥
यखन शरৎ काँपे
शिउलिफुलेर हरषे
नय़न भरे ये सेइ गोपन
गानेर परशे।
गभीर राते की सुर
लागाय़ आधो-घुमे आधो-जागाय़,
आमार
स्वपन-माझे देय़ ये की दोल दुलाय़े॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar kantho hote gaan ke nilo bhulaye, Se je baasa bnaadhe nirab moner kulaye. Megher dine shraabon maaser juthiboner dirghoshwaase Aamar-praane se dey paakhar chhaaya bulaye. Jakhon sharot knaape sheuliphuler harose Nayon bhare ja sei gopan gaaner paroshe. Gobhir raate ki sur laagay aadho-ghume aadho-jaagay, Aamar swapon-maajhe dey je ki dol dulay.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1922(১৩২৯)
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