आमार मन, यखन जागलि ना रे (ओ आमार मन, यखन जागलि - ओरे मन, यखन जागलि)
Amar mon jakhon jagli
पूजा
५५० आमार मन, यखन जागलि ना रे ओ तोर मनेर मानुष एल द्वारे। तार चले याओय़ार शव्द शुने भाङल रे घुम– ओ तोर भाङल रे घुम अन्धकारे॥ माटिर ’परे आँचल पाति एकला काटे निशीथराति। तार वाँशि वाजे आँधार-माझे, देखि ना ये चक्षे तारे॥ ओरे, तुइ याहारे दिलि फाँकि खुँजे तारे पाय़ कि आँखि? एखन पथे फिरे पावि कि रे घरेर वाहिर करलि यारे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar mon, jakhon jaagli na re O tor moner manus elo dwaare. Taar chole jaawar shabdo shune bhaanglo re ghum - O tor bhaanglo re ghum andhokare. Maatir pare aanchal paati ekla kaate nishithraati. Taar bnaashi baaje aandhar-maajhe, dekhi na je chokkhe taare. Ore, tui jaahare dili phnaaki khnuje taare paay ki aankhi ? Ekhon pathe phire paabi ki re gharer baahir korli jaare ?
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 550(পূজা)
- उप-पर्याय
- बौल(বৌল)
- राग
- बौल्-सुर(বাউল-সুর)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- घराना
- शास्त्रीय और क्षेत्रीय रूप(শাস্ত্রীয় ও আঞ্চলিক রূপ)
- संकलन
- गीतालि(গীতালি)
- स्थान
- सुरुल(সুরুল)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४४(স্বরবিতান ৪৪)
- स्वरलिपि
- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 6 September 1914(২১ ভাদ্র ১৩২১)
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