आमार प्रिय़ार छाय़ा
Amar priyar chhaya akashe
प्रकृति
आमार प्रिय़ार छाय़ा
आकाशे आज भासे, हाय़ हाय़।
वृष्टिसजल विषण्ण
निश्वासे, हाय़ हाय़॥
आमार प्रिय़ा मेघेर फाँके फाँके
सन्ध्याताराय़ लुकिय़े देखे काके,
सन्ध्यादीपेर लुप्त आलो स्मरणे तार आसे, हाय़॥
वारि-झरा वनेर गन्ध निय़ा
परश-हारा वरणमाला गाँथे आमार प्रिय़ा।
आमार प्रिय़ा घन श्रावणधाराय़
आकाश छेय़े मनेर कथा हाराय़॥
आमार प्रिय़ार आँचल दोले
निविड़ वनेर श्यामल उच्छासे, हाय़॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar priyar chhaaya Aakashe aaj bhaase, haay haay ! Brishti sajol bishanno nishwashe, haay. Aamar priya megher phaanke phaanke Sondhataaray lukiye dekhe kaake, Sondhadiper lupto aalo smarone taar aase, haay. Baari-jhara boner gondho niya Parosh-haara baron maala gnaathe aamar priya. Aamar priya ghano shraabonodhaaray Aakash chhere moner katha haaray. Aamar priyar aanchol dole Nibir boner shyamol uchhase, haay.
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- 1938(১৩৪৫)
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