आमार सकल काँटा धन्य करे सुरान्तर
Amar sakol kata dhanyo
पूजा
२९३
आमार सकल काँटा धन्य करे फुटवे फुल फुटवे।
आमार सकल व्यथा रङिन हय़े गोलाप हय़े उठवे॥
आमार अनेक दिनेर आकाश-चाओय़ा आसवे छुटे दखिन-हाओय़ा,
हृदय़ आमार आकुल करे सुगन्धधन लुटवे॥
आमार लज्जा यावे यखन पाव देवार मतो धन,
यखन रूप धरिय़े विकशिवे प्राणेर आराधन।
आमार वन्धु यखन रात्रिशेषे परश तारे करवे एसे,
फुरिय़े गिय़े दलगुलि सव चरणे तार लुटवे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aamar sakol knaata dhonyo kore phutbe phul phutbe. Aamar sakol byatha rongin hoye golap hoye utthbe. Aamar anek diner aakash-chaawa aashbe chhute dokhin-haawa, Hriday aamar aakul kore sugandhodhan lutbe. Aamar lajja jaabe jakhon paabo debar moto dhon, Jakhon rup dhoriye bikoshibe praaner aaradhon. Aamar bondhu jakhon raatri sheshe parosh taare korbe ese, Phuriye giye dolguli sob charone taar lutbe.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 30 November 1913(১৫ অগ্রহায়ণ ১৩২০)
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