आमि ज्वालव ना मोर वाताय़ने
Ami jalbo na mor
पूजा
३४८
आमि ज्वालव ना मोर वाताय़ने प्रदीप आनि,
आमि शुनव वसे आँधार-भरा गभीर वाणी॥
आमार ए देह मन मिलाय़े याक निशीथराते,
आमार लुकिय़े-फोटा एइ हृदय़ेर पुष्पपाते
थाक्-ना ढाका मोर वेदनार गन्धखानि॥
आमार सकल हृदय़ उधाओ हवे तारार माझे
येखाने
ओइ आँधारवीणाय़ आलो वाजे।
आमार सकल दिनेर पथ खोँजा एइ हल सारा,
एखन दिक्-विदिकेर शेषे एसे दिशाहारा
किसेर आशाय़ वसे आछि अभय़ मानि॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aami jwaalbo naa mor baatayane prodip aani, Aami shunbo bose aadhar bhora gobhir baani. Aamar e deho mon milaye jaak nishithoraate, Aamar lukiye phota ei hridayer pushpopaate, Thaak-na dhaaka mor bedonar gandhokhani. Aamar sakal hriday udhao hobe taarar maajhe Jekhane oi aadharbinay aalo baaje. Aamar sakal diner path khnoja ei holo saara, Ekhon dik-bidiker sheshe ese dishahara Kiser aashay bose aachhi abhoy maani.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1919(১৩২৬)
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