आपनहारा मातोय़ारा
Aponhara matoyara
प्रेम और प्रकृति
आपनहारा मातोय़ारा आछि तोमार आशा धरे– ओगो साकी, देवे ना कि पेय़ाला मोर भ’रे भ’रे॥ रसेर धारा सुधाय़ छाँका, मृगनाभिर आभास माखा गो, वातास वेय़े सुवास तारि दूरेर थेके माताय़ मोरे॥ मुख तुले चाओ ओगो प्रिय़े– तोमार हातेर प्रसाद दिय़े एक रजनीर मत एवार दाओ-ना आमाय़ अमर क’रे। नन्दननिकुञ्जशाखे अनेक कुसुम फुटे थाके गो, एमन मोहन रूप देखि नाइ, गन्ध एमन कोथाय़ ओरे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aaponhaara maatowara aachhi tomar aasha dhore. Ogo saakee, debe na ki peyala mor bhore bhore. Rasero dhaara sudhay chhnaaka, mrigonaabhir aabhaso maakha go, Baatas beye subas taari durer theke maatay more. Mukh tule chaao ogo priye - tomar haater prosad diye Ek rajonir moto ebaar daao na aamay aamar kore. Nandanonikunjoshaakhe anek kusum phute thaake go, Emon mohan rup dekhi naai, gandho emon kothay ore.
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- प्रेम और प्रकृति · 72(প্রেম ও প্রকৃতি)
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- शैलजरंजन मजुमदारशैलजरंजन मजुमदार1900–1992A teacher of chemistry at Visva-Bharati who became one of the great teachers of Rabindrasangeet, and the notator of many songs of the poet's last years.
- रचनाकाल
- February 1927(ফাল্গুন ১৩৩৩)
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