আষাঢ়, কোথা হতে আজ পেলি ছাড়া
Ashar kotha hote aj
Prakriti
आषाढ़, कोथा हते आज पेलि छाड़ा।
माठेर शेषे श्यामल वेशे क्षणेक दाँड़ा॥
जय़ध्वजा ओइ-ये तोमार गगन जुड़े।
पूव हते कोन् पश्चिमेते याय़ रे उड़े,
गुरु गुरु भेरी कारे देय़ ये साड़ा॥
नाचेर नेशा लागल तालेर पाताय़ पाताय़,
हाओय़ार दोलाय़ दोलाय़ शालेर वनके माताय़।
आकाश हते आकाशे कार छुटोछुटि,
वने वने मेघेर चाय़ाय़ लुटोपुटि–
भरा नदीर
ढेउय़े ढेउय़े के देय़ नाड़ा॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aasharh kotha hote aaj peli chhaara. Maatther sheshe shyamol beshe khonek dnaara. Joyodhwaja oi je tomar gagon jure. Pub hote kon poshchimete jaay re ure, Guru guru bheri kaare dey je saara. Naacher nesha laaglo taaler paatay paatay, Haawar dolay dolay shaaler bonke maatay. Aakash hote aakashe kaar chhutochhuti, Bone bone megher chhaayai lutoputi - Bhora nodir dheuye dheuye ke dey naara.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prakriti · 42(প্রকৃতি)
- उप-पर्याय
- Borsha
- ताल
- Dadra(দাদরা)
- घराना
- Hindustani
- ऋतु
- Barsha(বর্ষা)
- प्रकाशित
- Shantiniketan Patrika
- स्वरबितान खण्ड
- 30
- स्वरलिपि
- Anadikumar Dastidar
- रचनाकाल
- 1923(১৩৩০)
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