आय़ आय़ आय़ आमादेर अङ्गने
Ay ay ay amader angane
आनुष्ठानिक
आ य़ आ य़ आय़ आमादेर अङ्गने अतिथि वालक तरुदल– मानवेर स्नेहसङ्ग ने, चल् आमादेर घरे चल्॥ श्याम वङ्किम भङ्गिते चञ्चल कलसङ्गीते द्वारे निय़े आय़ शाखाय़ शाखाय़ प्राण-आनन्द-कोलाहल॥ तोदेर नवीन पल्लवे नाचुक आलोक सवितार, दे पवने वनवल्लभे मर्मरगीत-उपहार। आजि श्रावणेर वर्षणे आशीर्वादेर स्पर्श ने, पड़ुक माथाय़ पाताय़ पाताय़ अमरावतीर धाराजल॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Aay aay aay aamader angone otithi baalok torudal - Maanober snehasongo ne, chal aamader ghore chal. Shyamo bonkim bhongite chanchalo kalosongite Dwaare niye aay shaakhay shaakhay praano-aanndo-kolahol. Toder nobin pallabe nachuk aalok sobitar, De pabone bonoballabhe marmarogito-upohar. Aaji shraaboner barshane aashribaader sparsho ne, Poruk maathay paatay paatay amarabatir dhaarajal.
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- आनुष्ठानिक · 11(আনুষ্ঠানিক)
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- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 17 July 1929(২ শ্রাবণ ১৩৩৬)
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