गीत / Prakriti

আঁধার কুঁড়ির বাঁধন টুটে

Prakriti
आँधार कुँड़िर वाँधन टुटे  चाँदेर फुल उठेछे फुटे॥

    तार  गन्ध कोथाय़, गन्ध कोथाय़ रे।

    गन्ध आमार गभीर व्यथाय़ हृदय़-माझे लुटे॥

ओ  कखन यावे सरे,  आकाश हते पड़वे झरे।

    ओरे  राखव कोथाय़, राखव कोथाय़ रे।

    राखव ओरे आमार व्यथाय़ गानेर पत्रपुटे॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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