गीत / Puja

আজ নাহি নাহি নিদ্রা (আজি নাহি নাহি নিদ্রা - নাহি নাহি নিদ্রা)

Puja
४२५

आजि  नाहि नाहि निद्रा आँखिपाते।

तोमार भवनतले हेरि प्रदीप ज्वले,

दूरे वाहिरे तिमिरे आमि जागि जोड़हाते॥

त्रन्दन ध्वनिछे पथहारा पवने,

रजनी मूर्छागत विद्युतघाते।

द्वार खोलो हे द्वार खोलो–

प्रभु,    करो दय़ा, देहो देखा दुखराते॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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