गीत / Prem O Prakriti

বুকের বসন ছিঁড়ে (আজ বুকের বসন ছিঁড়ে)

Prem O Prakriti
आज   वुकेर वसन छिँड़े फेले दाँड़िय़ेछे एइ प्रभातखानि।

आकाशेते सोनार आलोय़ छड़िय़े गेल ताहार वाणी।

ओरे मन,   खुले दे मन, या आछे तोर
खुले दे–

अन्तरे या डुवे आछे   आलोक-पाने तुले दे।

आनन्दे सव वाधा टुटे    सवार साथे ओठ् रे
फुटे–

चोखेर ’परे आलस-भरे राखिस ने आर आँचल टानि॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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