गीत / Bichitra

আনন্দেরই সাগর হতে (আনন্দেরই সাগর থেকে)

Bichitra
आनन्देरइ सागर हते एसेछे आज वान।

दाँड़ ध’रे आज वोस् रे सवाइ, टान् रे सवाइ टान्॥

वोझा यत वोझाइ करि   करव रे पार दुखेर तरी,

ढेउय़ेर ‘परे धरव पाड़ि–याय़ यदि याक प्राण॥

के डाके रे पिछन हते, के करे रे माना,

भय़ेर कथा के वले आज– भय़ आछे सव जाना।

कोन् शापे कोन् ग्रहेर दोषे   सुखेर डाङाय़ थाकव वसे।

पालेर रशि धरव कषि, चलव गेय़े गान॥

यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।

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