বাজিল কাহার বীণা মধুর স্বরে
Bajilo kahar bina
Prem
२९
वाजिल काहार वीणा मधुर स्वरे
आमार निभृत नव जीवन-’परे।
प्रभातकमलसम फुटिल हृदय़ मम
कार दुटि निरुपम चरण-तरे॥
जेगे उठे सव शोभा, सव माधुरी,
पलके पलके हिय़ा पुलके पूरि।
कोथा हते समीरण आने नव जागरण,
परानेर आवरण मोचन करे॥
लागे वुके सुखे दुखे कत ये व्यथा,
केमने वुझाय़े कव ना जानि कथा।
आमार वासना आजि त्रिभुवने उठे वाजि,
काँपे
नदी वनराजि वेदनाभरे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Baajilo kaahar bina modhur sware Aamar nibhrito nabo jibano-pore Probhatokamolsamo phutilo hridayo mamo Kaar duti nirupamo charono-tare. Jege otthe sabo shobha, sabo maadhuri, Paloke paloke hiya puloke puri. Kotha hote somirano aane nabo jaagorano, Paraner aaborano mochon kore. Laage buke sukhe dukhe koto je byatha, Kemone bujhaye kabo na jaani katha. Aamar baasona aaji tribhubane utthe baaji, Knaape nodi bonoraaji bedonabhare.
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- Prem · 29(প্রেম)
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- रचनाकाल
- 1894(১৩০১)
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