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ভরা বাদর, মাহ ভাদর,
Bhara badara mah bhadara
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भरा वादर, माह भादर,
शून्यमन्दिर मोर ।
झञ्झा घन गरजन्ति सन्तति,
भुवन भरि वरिखन्तिया ।
कान्त पान्नन, विरह दारुण,
सघने खरशर हान्तिया ।
कुलिश-शत-शत-पात-मोदित
मयूर नाचत मातिया ।
मत्त दादुरी, डाके डाहुकी,
फाटि याओत छातिया !
तिमिर दिग भरि, घोर यामिनी,
अथिर विजुरिक पाँतिया ।
विद्यापति कहे, कैछे गोङायवि
हरि विने दिन रातिया ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
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- स्वरलिपि
- Dinendranath Tagore
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