भरा वादर, माह भादर,
Bhara badara mah bhadara
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भरा वादर, माह भादर, शून्यमन्दिर मोर । झञ्झा घन गरजन्ति सन्तति, भुवन भरि वरिखन्तिया । कान्त पान्नन, विरह दारुण, सघने खरशर हान्तिया । कुलिश-शत-शत-पात-मोदित मयूर नाचत मातिया । मत्त दादुरी, डाके डाहुकी, फाटि याओत छातिया ! तिमिर दिग भरि, घोर यामिनी, अथिर विजुरिक पाँतिया । विद्यापति कहे, कैछे गोङायवि हरि विने दिन रातिया ॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain
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