भेङेछे दुय़ार, एसेछ ज्योतिर्मय़, तोमारि हउक जय़
Bhengechho duyar esechho
पूजा
भेङेछे दुय़ार, एसेछ ज्योतिर्मय़, तोमारि हउक जय़। तिमिरविदार उदार अभ्युदय़, तोमारि हउक जय़॥ हे विजय़ी वीर, नव जीवनेर प्राते नवीन आशार खड़्ग तोमार हाते– जीर्ण आवेश काटो सुकठोर घाते, वन्धन होक क्षय़॥ एसो दु:सह, एसो एसो निर्दय़, तोमारि हउक जय़। एसो निर्मल, एसो एसो निर्भय़, तोमारि हउक जय़। प्रभातसूर्य, एसेछ रुद्रसाजे, दुःखेर पथे तोमार तूर्य वाजे– अरुणवह्नि ज्वालाओ चित्तमाझे, मृत्युर होक लय़॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bhengechho duwar, esechho jyotirmoy, tomari houk joy. Timirobidar udaar abhyudoy, tomari houk joy. Hey bijoyee bir, nabo jiboner praate Nobino aashar khargo tomar haate - Jirno aabesh kaato sukatthor ghaate, bandhano hok khoy. Eso duhsaho, eso eso nirdoy, tomari houk joy. Eso nirmalo, eso eso nirbhoy, tomari houk joy. Probhat surjyo, esechho rudrosaaje, Dukher pathe tomari turjyo baaje - Orunobonhi jaagao chittomaajhe, mritur hok loy.
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यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 373(পূজা)
- उप-पर्याय
- बिबिध(বিবিধ)
- राग
- भैरवि(ভৈরবী)
- ताल
- दद्र(দাদরা)
- संकलन
- गीतालि(গীতালি)
- स्थान
- प्रयागराज (इलाहाबाद)(এলাহাবাদ)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबीतन ४४(স্বরবিতান ৪৪)
- स्वरलिपि
- सुधीर चंद्र करसुधीर चंद्र कर1906–1977Rabindranath's personal scribe in his last years: when illness kept the poet from writing, he dictated and Sudhirchandra set it down.
- रचनाकाल
- 16 October 1914(৩০ আশ্বিন ১৩২১)
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