विरस दिन, विरल काज, प्रवल विद्रोहे
Biraso din biralo kaj
प्रेम
२८
विरस दिन विरल काज, प्रवल
विद्रोहे
एसेछ प्रेम, एसेछ आज की महा
समारोहे॥
एकेला रइ अलसमन, नीरव एइ भवनकोण,
भाङिले द्वार कोन् से क्षण अपराजित ओहे॥
कानन-’पर छाय़ा वुलाय़, घनाय़
घनघटा।
गङ्गा येन हेसे दुलाय़ धूर्जटिर
जटा।
येथा ये रय़ छाड़िल पथ, छुटाले ओइ विजय़रथ,
आँखि तोमार तड़ितवৎ घनघुमेर मोहे
॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Biraso din biralo kaaj, probalo bidrohe Esechho prem, esechho aaj ki maha samarohe. Ekela roi alasomono, nirabo ei bhabanokon, Bhaangile dwaar kon se khan aparajito ohey. Kaanan-paro chhaaya bulay, ghanay ghanoghata. Ganga jeno hese dulay dhurjatiro jota. Jetha ja roy chhaarilo patho, chhutale oi bijayoratho, Aankhi tomar toritobat ghanoghumer mohe.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- April 1926(বৈশাখ ১৩৩৩)
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