वन्धु, रहो रहो साथे
Bondhu raho raho
प्रकृति
वन्धु, रहो रहो साथे आजि ए सघन श्रावणप्राते। छिले कि मोर स्वपने साथिहारा राते॥ वन्धु, वेला वृथा याय रे आजि ए वादले आवुल हाओयाय रे— कथा कओ मोर हृदये, हात राखो हाते॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bondhu raho raho saathe Aaji e saghano shraabono praate. Chhile ki mor swapone saathihaara raate. Bondhu bela britha jaay re Aaji e baadole aakul haaway re - Katha kao mor hridaye, haath raakho haate.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1933(১৩৪০)
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