वुझेछि कि वुझि नाइ वा से तर्के काज नाइ
Bujhechi ki bujhi nai
पूजा
३४४
वुझेछि कि वुझि नाइ वा से तर्के काज नाइ,
भालो आमार लेगेछे ये रइल सेइ कथाइ॥
भोरेर आलोय़
नय़न भ’रे नित्यके पाइ नूतन करे,
काहार मुखे चाइ॥
प्रतिदिनेर काजेर पथे करते आनागोना
काने आमार लेगेछे गान, करेछे आन्मना।
हृदय़े मोर कखन जानि पड़ल पाय़ेर चिह्नखानि
चेय़े देखि ताइ॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Bujechhi ki bujhi naai ba se tarke kaaj naai, Bhaalo aamar legechhe je roilo sei kathaai. Bhorer aaloy nayon bhore nityoke paai natun kore, Kaahar mukhe chaai. Protidiner kaajer pathe korte aanagona Kaane aamar legechhe gaan, korechhe aanmona. Hridaye mor kakhon jaani paralo paayer chinhokhaani Cheye dekhi taai.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इसके लिए उच्च योजना चाहिए — अधिक मासिक प्ले और एक्सपोर्ट, गाने की स्वरलिपि तथा स्केल, वाद्ययंत्र, ताल और लय नियंत्रण के लिए अपग्रेड करें। सभी प्लान देखें → Patreon से साइन इन करें
यूट्यूब पर
- पर्याय
- पूजा · 344(পূজা)
- उप-पर्याय
- बिश्व(বিশ্ব)
- राग
- भैरवि(ভৈরবী)
- ताल
- कहर्व(কাহারবা)
- घराना
- हिन्दुस्तानी(হিন্দুস্তানি)
- स्वरबितान खण्ड
- स्वरबितन १४ (नबगितिक) / १(স্বরবিতান ১৪ (নবগীতিকা) / ১)
- स्वरलिपि
- दिनेंद्रनाथ ठाकुर
दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 1921(১৩২৮)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।