चरणरेखा तव ये पथे दिले लेखि
Charanorekha tabo je 1
प्रकृति
चरणरेखा तव ये पथे दिले लेखि
चिह्न आजि तारि आपनि घुचाले कि।
अशोकरेणुगुलि राङालो यार धूलि
तारे ये
तृणतले आजिके लीन देखि॥
फुराय़ फुल-फोटा, पाखिओ गान भोले,
दखिनवाय़ु सेओ उदासी याय़ चले।
तवु कि भरि
तारे अमृत छिल ना रे–
स्मरण तारो
कि गो मरणे यावे ठेकि! यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Charonorekha tabo je pathe dile lekhi Chinho aaji taari aaponi ghuchale ki. Ashokrenuguli raangalo jaar dhuli Taare je trinotale aajike leen dekhi Phuraay phul-phota, paakhio gaan bhole, Dokhinbaayu se-o udaasi jaay chole. Tobu ki bhori taare amrito chhilo na re - Smaron taaro ki go marone jaabe theki.
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दिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain - रचनाकाल
- 3 March 1927(১৯ ফাল্গুন ১৩৩৩)
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