छिल ये परानेर अन्धकारे
एल से भुवनेर आलोक-पारे॥
स्वपनवाधा टुटि वाहिरे एल छुटि,
अवाक् आँखि दुटि हेरिल तारे॥
मालाटि गेँथेछिनु अश्रुधारे,
तारे ये वेँधेछिनु से माय़ाहारे।
नीरव वेदनाय़ पूजिनु यारे हाय़
निखिल तारि गाय़ वन्दना रे॥
यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Chhilo je paraaner andhokaare
Elo se bhuboner aalok-paare.
Swaponbaadha tuti baahire elo chhuti,
Abaak aankhi duti herilo taare.
Maalati gnethechhinu ashrudhare,
Taare je bnedhechhinu se maayahaare.
Nirab bedonaay pujinu jaare haay
Nikhil taari gaay bandona re.
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स्वरबितन १६ (गीतपन्चशिक)(স্বরবিতান ১৬ (গীতপঞ্চাশিকা))
स्वरलिपि
दिनेंद्रनाथ ठाकुरदिनेंद्रनाथ ठाकुर1882–1935Rabindranath's grand-nephew and the principal notator of his songs — the poet called him the keeper of all his songs. Taught music at Santiniketan.Photographer unknown, c. 1935 · Wikimedia Commons, public domain
रचनाकाल
1918(১৩২৫)
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