চিত্ত পিপাসিত রে
Chitto pipasito re
Prem
१
चित्त पिपासित रे
गीतसुधार तरे॥
तापित शुष्कलता वर्षण
याचे यथा
कातर अन्तर मोर लुन्ठित धूलि-’परे
गीतसुधार तरे॥
आजि वसन्तनिशा, आजि अनन्त तृषा,
आजि ए जाग्रत प्राण तृषित चकोर-समान
गीतसुधार तरे।
चन्द्र अतन्द्र नभे जागिछे सुप्त भवे,
अन्तर वाहिर आजि काँदे उदास स्वरे
गीतसुधार तरे॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Chitto pipasito re Gitosudhar tare. Taapita shuskolata barshan jaache jatha Kaatar antar mor luntthito dhuli pare Gitosudhar tare. Aaji basontonisha, aaji anonto trisha Aaji e jaagrato praan trishito chakor-saman Gitosudhar tare. Chandro atandro nabhe jaagiche supto bhabe, Antar baahir aaji knaade udaes sware Gitosudhar tare.
मेरा नोट
निजी नोट आपकी योजना में शामिल नहीं हैं।सदस्य बनें →
इंटरैक्टिव स्वरलिपि जल्द ही आ रही है।
यूट्यूब पर
- पर्याय
- Prem · 1(প্রেম)
- उप-पर्याय
- Gaan
- राग
- Khambaj(খাম্বাজ)
- ताल
- Jhaptaal(ঝাঁপতাল)
- घराना
- Hindustani
- स्वरबितान खण्ड
- 10
- स्वरलिपि
- Jyotirindranath Tagore
- रचनाकाल
- 1895(১৩০২)
AI अनुवाद
अभी कोई अनुवाद नहीं — नीचे कोई भाषा चुनकर AI से अनुवाद बनाएँ।
भाषाएँ
प्रीमियम भाषाएँ
AI-निर्मित
अनुवाद बन रहा है…
इस समय अनुवाद नहीं बनाया जा सका। फिर से प्रयास करें।
इस गीत में कोई गलती दिखी?