डाकिल मोरे जागार साथि
Dakilo more jagar sathi
पूजा
५२९
डाकिल मोरे जागार साथि।
प्राणेर माझे विभास
वाजे, प्रभात हल आँधार राति॥
वाजाय़ वाँशि
तन्द्रा-भाङा, छड़ाय़ तारि वसन राङा–
फुलेर वासे
एइ वातासे की माय़ाखानि दिय़ेछे गाँथि॥
गोपनतम
अन्तरे की लेखनरेखा दिय़ेछे लेखि!
मन तो तारि नाम जाने
ना, रूप आजिओ नय़ ये चेना,
वेदना मम
विछाय़े दिय़े रेखेछि तारि आसन पाति॥ यह गीत का अनुवाद नहीं, केवल बांग्ला बोलों का देवनागरी लिप्यंतरण है। अनुवाद के लिए अनुवाद टैब देखें।
लिप्यंतरण
Daakilo more jaagar saathi. Praaner maajhe bibhas baaje, probhat holo aandhar raati. Baajai bnaashi tandra-bhaanga, chharaay taari bason raanga - Phuler baase ei baatase ki maayakhani diyechhe gnaathi. Gopanotamo antare ki lekhon rekha diyechhe lekhi ! Mon to taari naam jaane na, rup aajio noy je chena Bedona mamo bichhaye diye rekhechhi taari aason paati.
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- अनादिकुमार दस्तिदारअनादिकुमार दस्तिदार1903–1974Singer and teacher, and one of the notable propagators of Rabindrasangeet.
- रचनाकाल
- 1927(১৩৩৪)
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